Dr. Purushottam Meghwal

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भूमि अदला-बदली (एक्सचेंज डीड) के बाद नामांतरण विवाद: जब सामने वाला किसान मर जाए तो क्या होगा? – एक केस स्टडी

भूमि अदला-बदली और नामांतरण विवाद – केस स्टडी 🖨️ प्रिंट करें / PDF बनाएँ भूमि अदला-बदली (एक्सचेंज डीड) के बाद नामांतरण विवाद जब सामने वाला किसान मर जाए तो क्या होगा? – एक केस स्टडी केस का विवरण: द्वितीय अपील क्रमांक 169/2020  |  निर्णय दिनांक: 31 मार्च, 2023  |  पीठ: माननीय न्यायमूर्ति श्री गुरपाल सिंह […]

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⚖️ भूमि अधिग्रहण में असिंचित भूमि को सिंचित मानकर प्रतिकर — उच्च न्यायालय ने राज्य की अपील खारिज की

“सिमरी तालाब योजना अन्तर्गत नहर निर्माण” हेतु अधिगृहीत भूमि — राजस्व अभिलेखों में सिंचित दर्ज — LAO ने असिंचित मानकर प्रतिकर दिया — Reference Court एवं उच्च न्यायालय ने किसान के पक्ष में निर्णय दिया 📋 प्रकरण की पहचान प्रकरण: प्रथम अपील क्र. 358/2024 (म.प्र. उच्च न्यायालय, जबलपुर) निर्णय दिनांक: 18 फरवरी, 2026 न्यायपीठ: माननीय

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⚖️ अवैध खनन में Collector की दण्डात्मक शक्ति को उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा — विस्तृत विधिक विश्लेषण

शासकीय भूमि से “मुरम” का अवैध उत्खनन — ₹18,63,000/- का दण्ड एवं वाहन/मशीन ज़ब्ती — तीनों प्राधिकारियों (Collector, Commissioner, Board of Revenue) के आदेश वैध 📋 प्रकरण की पहचान प्रकरण: रिट याचिका क्र. 232/2026 (म.प्र. उच्च न्यायालय, जबलपुर) निर्णय दिनांक: 09 जनवरी, 2026 न्यायपीठ: माननीय न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री प्रदीप मित्तल

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स्टाम्प शुल्क निर्धारण — भूमि का वास्तविक उपयोग राजस्व अभिलेख से तय होता है, केवल विक्रय-पत्र के उल्लेख से नहीं

  स्टाम्प शुल्क निर्धारण — भूमि का वास्तविक उपयोग राजस्व अभिलेख से तय होता है, केवल विक्रय-पत्र के उल्लेख से नहीं एक विस्तृत विधिक विश्लेषण पाँच निर्णयों के आलोक में 🔷 भाग I: विधिक ढाँचा — तीन स्तंभ जिन पर यह पूरी व्यवस्था खड़ी है स्टाम्प शुल्क निर्धारण का पूरा तंत्र तीन विधिक प्रावधानों पर

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धारा 115, म.प्र. भू-राजस्व संहिता, 1959 — शासकीय हित में Collector की भूमिका: एक विस्तृत विश्लेषण

  🔷 I. धारा 115 का पूर्ण विधिक ढाँचा (Legislative Framework) धारा 115 का शीर्षक है “भू-अभिलेख में गलत या अशुद्ध प्रविष्टि का संशोधन” (Correction of wrong or incorrect entry in land record)। इस धारा में तीन उपधाराएँ (sub-sections) हैं, जो मिलकर एक त्रि-स्तरीय प्रणाली (three-tier system) बनाती हैं। इसे समझने के लिए इसे एक

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जब 77 साल की लड़ाई एक प्रक्रियागत भूल से हार जाती है — SDO की अधिकारिता और भूमिस्वामी अधिकार का संघर्ष

🏛️ द्वितीय अपील सं. 367/2001 मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर पीठ निर्णय दिनांक: 16 मार्च 2026 न्यायाधीश: माननीय न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया Neutral Citation: 2026:MPHC-GWL:9765 ⚖️ जब 77 साल की लड़ाई एक प्रक्रियागत भूल से हार जाती है — SDO की अधिकारिता और भूमिस्वामी अधिकार का संघर्ष 📋 संक्षिप्त तथ्य यह प्रकरण ग्राम ईसाह, तहसील अम्बाह, जिला

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कृषि भूमि का अवैध उपयोग और अवैध कॉलोनाइज़ेशन: SDO और नगरपालिका के अधिकार क्षेत्र का पारस्परिक संबंध

Section 172 MPLRC एवं Section 339-C MP Municipalities Act — विस्तृत विश्लेषण

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6D विकास अनुबंध की वैधता – भूमि स्वामी की मृत्यु के पश्चात

6D विकास अनुबंध की वैधता – भूमि स्वामी की मृत्यु के पश्चात मुख्य सिद्धांत: 6D अनुबंध भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद भी वैध रहेगा। विधिक आधार: 1. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 37: इस धारा के अनुसार, किसी संविदा के पक्षकारों को अपने-अपने वचनों (promises) का पालन करना होगा, या पालन की प्रस्थापना

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अवयस्क बच्चों की अभिरक्षा में बाल कल्याण सर्वोपरि – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय

अवयस्क बच्चों की अभिरक्षा में बाल कल्याण सर्वोपरि – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय न्यायालय एवं निर्णय तिथि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर माननीय न्यायमूर्ति शील नागू एवं माननीय न्यायमूर्ति विनय सराफ निर्णय दिनांक: 17 जनवरी, 2024 प्रथम अपील क्रमांक 1874/2023 संक्षिप्त तथ्य यह मामला एक माता द्वारा अपने दो अवयस्क पुत्रों की अभिरक्षा (Custody) प्राप्त

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बैंक ऋण वसूली में गिरवी संपत्ति पर पुनः कब्जा दिलाने का अधिकार

बैंक ऋण वसूली में गिरवी संपत्ति पर पुनः कब्जा दिलाने का अधिकार मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर रिट याचिका संख्या 1681/2025 निर्णय दिनांक: 16 जून, 2025 संक्षिप्त तथ्य (Brief Facts) यह मामला एक वित्तीय संस्था (बैंक/फाइनेंस कंपनी) और एक कर्जदार के बीच का है। मामले की मुख्य बातें इस प्रकार हैं: ऋण और चूक की

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