Dr. Purushottam Meghwal

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भोपाल स्मार्ट सिटी भूमि आवंटन विवाद: एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय

संक्षिप्त तथ्य:* एक साझेदारी फर्म ने भोपाल स्मार्ट सिटी विकास निगम द्वारा एरिया बेस्ड डेवलपमेंट (ABD) प्रोजेक्ट के अंतर्गत व्यावसायिक भूखंड संख्या 82 के आवंटन हेतु बोली लगाई। यह परियोजना लगभग 342 एकड़ भूमि पर उत्तर और दक्षिण टी.टी. नगर क्षेत्र में स्थित थी। याचिकाकर्ता फर्म ने सर्वोच्च बोली लगाई और कुल विक्रय मूल्य 35.11 […]

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*कृषि भूमि अधिशेष घोषणा संबंधी मामला – उच्च न्यायालय का निर्णय*

कृषि भूमि अधिशेष घोषणा संबंधी मामला – उच्च न्यायालय का निर्णय मुख्य तथ्य पृष्ठभूमि 1975-76 में उप-मंडल अधिकारी ने कृषि भूमि की अधिकतम सीमा अधिनियम, 1960 के तहत कार्यवाही शुरू की। इस कार्यवाही में 97.61 एकड़ भूमि में से 43.61 एकड़ को अधिशेष घोषित किया गया। यह आदेश 26 फरवरी 1976 को पारित किया गया

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धारा 250 के तहत भूमि विवाद में न्यायिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का महत्व

सीमांकन और अतिक्रमण: उच्च न्यायालय के निर्णयों से सीखें मामले के तथ्य मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष यह याचिका अतिरिक्त आयुक्त, रीवा संभाग द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.07.2019 को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। इस आदेश ने उप-विभागीय अधिकारी और तहसीलदार के आदेशों की पुष्टि की थी, जिसमें तहसीलदार ने

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फौती नामांतरण और बँटवारा एक साथ हो सकता है

हां, फौती नामांतरण और बँटवारा एक साथ किया जा सकता है। मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता में इसका विशेष प्रावधान है जिससे उत्तराधिकारियों को दो अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता नहीं होती। विधिक प्रावधान मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-अभिलेखों में नामांतरण) नियम, 2018 के नियम 10 और 11 में स्पष्ट प्रावधान किया गया है: आवेदन

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भूमि सीमांकन में हित धारकों को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय

सीमांकन (डिमार्केशन) प्रक्रिया में सुनवाई का अवसर अनिवार्य है तथ्य संक्षेप इस मामले में एक ट्रस्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। याचिका में उप-खंड अधिकारी (राजस्व), मंदसौर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें ट्रस्ट के एमपी भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 129(5) के तहत आवेदन को

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मंदिर भूमि प्रबंधन: विधिक मार्गदर्शिका

सार्वजनिक न्यास विघटन के प्रकरण में रजिस्ट्रार की सीमित शक्तियां प्रकरण का संक्षिप्त विवरण एक पंजीकृत धार्मिक न्यास (गणेश मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट) ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में उप-खंड अधिकारी (एस.डी.ओ.) और रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट, सोहागपुर, जिला शहडोल द्वारा दिनांक 15.03.2022 को पारित आदेश को चुनौती दी

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वसीयत के आधार पर भूमि नामांतरण: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय

फुल बेंच द्वारा किए गए कानूनी विश्लेषण के मुख्य बिंदु

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अस्थायी निषेधाज्ञा (स्टे ऑर्डर) पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

अस्थायी निषेधाज्ञा (स्टे ऑर्डर) पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय संक्षिप्त तथ्य एक परिवार के मामले में संपत्ति विवाद के दौरान याचिकाकर्ता (एक बेटी) ने अपने भाइयों के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया था। याचिकाकर्ता का दावा था कि उसके पिता की संपत्ति में उसका 1/5 हिस्सा है और उसने अपने भाइयों को इस

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सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण का मामला – नक्शे के अनुसार सही भूमि स्वामित्व का निर्धारण

सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण का मामला: नक्शे के अनुसार सही भूमि स्वामित्व का निर्धारण संक्षिप्त तथ्य कुछ व्यक्तियों ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता कलेक्टर, रीवा द्वारा 19.03.2025 को पारित आदेश से व्यथित थे। इस आदेश में कलेक्टर ने भूमि के सीमांकन के बाद पाया था कि: याचिकाकर्ताओं का

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मध्यप्रदेश समाज के कमजोर वर्गों के कृषि भूमि धारकों को उधार देने वालों के भूमि हड़पने संबंधी कुचक्रों से परित्राण तथा मुक्ति अधिनियम, 1976 के मूलभूत प्रावधान

मध्यप्रदेश कृषि भूमि संरक्षण अधिनियम, 1976 पहले यह समझिए कि यह कानून क्यों बना था। पुराने समय में गाँव का गरीब किसान जब मजबूरी में साहूकार से पैसा उधार लेता था, तो साहूकार अक्सर पैसे के बदले उसकी जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा लेता था। कहने को वह विक्रय होता था, पर असल में

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