6D विकास अनुबंध की वैधता – भूमि स्वामी की मृत्यु के पश्चात

6D विकास अनुबंध की वैधता – भूमि स्वामी की मृत्यु के पश्चात

मुख्य सिद्धांत: 6D अनुबंध भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद भी वैध रहेगा।

विधिक आधार:

1. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 37: इस धारा के अनुसार, किसी संविदा के पक्षकारों को अपने-अपने वचनों (promises) का पालन करना होगा, या पालन की प्रस्थापना करनी होगी, जब तक कि संविदा की शर्तों द्वारा या इस अधिनियम के अधीन ऐसा पालन माफ न कर दिया गया हो। इस धारा का दूसरा भाग यह स्पष्ट करता है कि “जहां वचनकर्ता (promisor) की मृत्यु हो जाती है, वहां उसके विधिक प्रतिनिधि (legal representatives) उस संविदा से बाध्य होते हैं, जब तक कि संविदा व्यक्तिगत कौशल या योग्यता पर आधारित न हो।”

2. विकास अनुबंध की प्रकृति: 6D विकास अनुबंध एक “Real Right” (वास्तविक अधिकार) सृजित करता है, न कि केवल “Personal Right”। यह अनुबंध भूमि से संबद्ध होता है और भूमि के साथ चलता है (runs with the land)। जैसा कि मैंने FORM-XX (नियम 20(3)) में देखा, इसमें स्पष्ट रूप से लिखा होता है: “which expression shall include their respective successors and permitted assigns” – अर्थात् यह अनुबंध उत्तराधिकारियों और अनुमत समनुदेशितियों (assigns) पर भी बाध्यकारी होता है।

3. उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधान: भूमि स्वामी की मृत्यु पर, उसके विधिक उत्तराधिकारी (Legal Heirs) स्वतः ही उसके सभी अधिकारों एवं दायित्वों के उत्तराधिकारी बन जाते हैं। 6D अनुबंध के अंतर्गत जो भी अधिकार और कर्तव्य भूमि स्वामी के थे, वे उसके उत्तराधिकारियों पर स्वचालित रूप से हस्तांतरित हो जाते हैं।

4. न्यायिक दृष्टिकोण: सुप्रीम कोर्ट ने COX & Kings Ltd. Vs. SAP India Private Limited, (2024) 4 SCC 1 में स्पष्ट किया है कि अनुबंध न केवल पक्षकारों को, बल्कि उनके माध्यम से या अधीन दावा करने वाले व्यक्तियों (“persons claiming through or under”) को भी बाध्य करता है।

समय-सीमा न होने की स्थिति में:

जहां 6D अनुबंध में कोई विशिष्ट समय-सीमा (validity period) नहीं लिखी गई है, वहां अनुबंध तब तक वैध रहेगा जब तक:

  • अनुबंध का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो जाता (परियोजना पूर्णता)
  • दोनों पक्ष पारस्परिक सहमति से इसे समाप्त नहीं कर देते
  • किसी सक्षम न्यायालय द्वारा इसे निरस्त नहीं कर दिया जाता

व्यावहारिक सुझाव:

भविष्य में विवादों से बचने के लिए, विकासकर्ता (Developer) को चाहिए कि वह भूमि स्वामी की मृत्यु के पश्चात उसके विधिक उत्तराधिकारियों से एक “Confirmation/Ratification Agreement” करवा ले, जिसमें वे मूल 6D अनुबंध की पुष्टि करें और परियोजना में सहयोग की सहमति दें। यद्यपि यह अनिवार्य नहीं है, परंतु यह भविष्य के किसी भी विवाद से बचाव का एक सुरक्षित उपाय है।

निष्कर्ष: भूमि स्वामी की मृत्यु से 6D अनुबंध स्वतः समाप्त नहीं होता। उत्तराधिकारी मूल भूमि स्वामी के स्थान पर प्रतिस्थापित हो जाते हैं और अनुबंध की सभी शर्तें उन पर बाध्यकारी रहती हैं।

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