सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण का मामला – नक्शे के अनुसार सही भूमि स्वामित्व का निर्धारण

सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण का मामला: नक्शे के अनुसार सही भूमि स्वामित्व का निर्धारण

संक्षिप्त तथ्य

कुछ व्यक्तियों ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता कलेक्टर, रीवा द्वारा 19.03.2025 को पारित आदेश से व्यथित थे। इस आदेश में कलेक्टर ने भूमि के सीमांकन के बाद पाया था कि:

  1. सर्वे नंबर 52/3 में 0.008 हेक्टेयर भूमि पर एक व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण किया गया है
  2. सर्वे नंबर 54/2 में 0.004 हेक्टेयर भूमि पर एक अन्य व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण किया गया है
  3. सर्वे नंबर 53/2 में 0.008 हेक्टेयर भूमि पर एक तीसरे व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण किया गया है

याचिकाकर्ताओं का दावा था कि वे पूरे खसरा नंबर के मालिक हैं और उन्होंने अपनी भूमि (सर्वे नंबर 52/1, 53/1 और 54/1) का कोई हिस्सा नहीं बेचा है। उनका यह भी कहना था कि उन्हें सुनवाई का अवसर दिए बिना कलेक्टर द्वारा यह आदेश पारित किया गया था।

निर्णय और कारण

माननीय न्यायाधीश विवेक अग्रवाल ने याचिका को खारिज कर दिया। निर्णय के मुख्य कारण इस प्रकार थे:

  1. सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया था: कलेक्टर ने अपने आदेश के पैराग्राफ 7 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि सीमांकन याचिकाकर्ताओं की उपस्थिति में किया गया था और वे कलेक्टर के समक्ष विधिवत प्रतिनिधित्व किए गए थे।
  2. अलग-अलग भूमि खंड: सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि याचिकाकर्ता सर्वे नंबर 52/1, 53/1 और 54/1 के मालिक थे, जबकि अतिक्रमण सर्वे नंबर 52/3, 53/2 और 54/2 पर पाया गया था। ये अलग-अलग भूमि खंड हैं।
  3. राजस्व रिकॉर्ड की पुष्टि: याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत अनुलग्नक P-2 (राजस्व रिकॉर्ड) से भी यह स्पष्ट था कि वे केवल सर्वे नंबर 52/1, 53/1 और 54/1 के मालिक के रूप में दर्ज थे, न कि उन भूमि खंडों के, जिन पर अतिक्रमण पाया गया था।
  4. स्वामित्व का अभाव: याचिकाकर्ताओं ने उन भूमि खंडों पर अपने किसी भी स्वामित्व अधिकार, हक या कब्जे को प्रदर्शित नहीं किया, जिन पर कलेक्टर ने अतिक्रमण पाया था।

न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ताओं ने अपने स्वामित्व वाली भूमि को साबित करने का असफल प्रयास किया था। वास्तविकता यह थी कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, वे केवल सर्वे नंबर 52/1, 53/1 और 54/1 के मालिक थे, न कि उन भूमि खंडों के जिन पर अतिक्रमण पाया गया था (52/3, 53/2 और 54/2)। इसलिए, कलेक्टर के आदेश में कोई त्रुटि नहीं थी और याचिका को खारिज कर दिया गया।

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