हां, फौती नामांतरण और बँटवारा एक साथ किया जा सकता है। मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता में इसका विशेष प्रावधान है जिससे उत्तराधिकारियों को दो अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता नहीं होती।
विधिक प्रावधान
मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-अभिलेखों में नामांतरण) नियम, 2018 के नियम 10 और 11 में स्पष्ट प्रावधान किया गया है:
- नियम 10: कृषि प्रयोजन की भूमि में अधिकार अर्जित करने वाला व्यक्ति, भू-अभिलेखों में नामांतरण (धारा 110) और खाते का विभाजन (धारा 178) दोनों के लिए एक ही साथ आवेदन कर सकता है।
- नियम 11: तहसीलदार ऐसे आवेदन पर एक ही प्रकरण में दोनों प्रक्रियाओं के लिए सुनवाई करेगा और एक ही आदेश पारित करेगा।
आवेदन प्रक्रिया
- प्रपत्र-पांच में आवेदन: फौती नामांतरण और बँटवारा दोनों के लिए आवेदक को प्रपत्र-पांच में आवेदन करना होता है।
- आवश्यक दस्तावेज:
- मृत व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र
- वंशावली/उत्तराधिकारियों की सूची और उनके हिस्से
- खसरा की प्रति
- फीस जमा करने का प्रमाण
- अन्य आवश्यक दस्तावेज
- प्रक्रिया: तहसीलदार एक ही मामले में दोनों पहलुओं की जांच करेगा – पहले उत्तराधिकार द्वारा नामांतरण और फिर उन उत्तराधिकारियों के बीच भूमि का विभाजन।
लाभ
इस एकीकृत प्रक्रिया के कई लाभ हैं:
- समय की बचत: दो अलग-अलग प्रक्रियाओं के बजाय एक ही प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है
- कम दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता: एक ही बार सभी दस्तावेज जमा किए जाते हैं
- न्यायिक कार्यवाही का सरलीकरण: एक ही अधिकारी द्वारा पूरी प्रक्रिया संचालित की जाती है
- शीघ्र निष्पादन: उत्तराधिकारियों को जल्दी से अपने हिस्से का भूखंड मिल जाता है
यह प्रावधान विशेष रूप से कृषि भूमि के मामलों में उत्तराधिकारियों के लिए बहुत उपयोगी साबित हुआ है।

